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रामघाट पर हुआ कार्तिक पूर्णिमा स्नान, भक्तों ने लगाई आस्था की डुबकी, गूंज उठा हर-हर मां शिप्रे

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वर्ष भर में आने वाली कार्तिक माह की सबसे बड़ी पूर्णिमा आज (सोमवार) भूमादित्य सहित चार राज्यों के साथ आई है। इस पूर्णिमा पर आज सुबह श्रद्धालुओं ने शिप्रा तट रामघाट पर आस्था की डुबकी लगाई और हर-हर शिप्रा का जयघोष किया। सुबह रामघाट पर जहां श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर धर्म लाभ अर्जित किया। वहीं, सिद्धवट पर पितरों के निमित्त सुखपिंडी और तर्पण भी किए शाम को भी पितरों के निमित्त दीपदान किए जाएंगे। बाबा गुमानदेव पीठ के प्रमुख व ज्योतिषाचार्य पंडित चंदन व्यास ने बताया कि कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसी कारण से सभी देवी देवता मिलकर खुशियां मनाते हैं तथा धरती पर उतरकर दीपोत्सव करते हैं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। शिप्रा तट पर दीपदान करने के साथ-साथ आज रात में छह कृतिकाओं का पूजन करने का भी बड़ा महत्व है। इस दिन मंगल अपनी राशि वृश्चिक में सूर्य के साथ विद्यमान होकर भौमादित्य नामक राजयोग तथा सूर्य बुध एक साथ वृश्चिक राशि में विद्यमान होकर बुधादित्य नामक राज योग का निर्माण कर रहे हैं, साथ ही साथ रुचक एवं शश नामक पंच महापुरुष योग इस दिन की महत्ता को बढ़ा रहे हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर आज सुबह श्रद्धालुओं ने रामघाट और सिद्धवट पर आस्था की डुबकी लगाई और उसके बाद देव दर्शन किए। आज सुबह श्री महाकालेश्वर मंदिर, मंगलनाथ, सिद्धनाथ, गोपाल मंदिर व अन्य देव स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दी। शहरी क्षेत्र के साथ ही आज ग्रामीण क्षेत्र से भी स्नान में दान पूर्ण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आज उज्जैन पहुंचे थे, जिन्होंने मंदिरों में देव दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने दान पुण्य भी किया। कोई गायों को चारा डालते दिखाई दिए तो किसी ने भिक्षुओं को भी दान दिया।
कार्तिक मेले में भी रही भीड़ 
शिप्रा किनारे लगने वाले कार्तिक मेले में भी आज लोगों की भारी भीड़ दिखाई दी। किसी ने यहां जलेबी और गराडू के आनंद लिए तो कोई झूले में झूलता हुआ नजर आया। याद रहे की उज्जैन में लगने वाले इस मेले में हमेशा ही बाहर से आने वाले श्रद्धालु शामिल होते हैं और अपनी जरूरत के सामान खरीदने के साथ ही यहां लगने वाले झूले और अन्य संसाधनों का भी लाभ लेते हैं। आज दिन भर व रात को मेले में भारी भीड़ रहेगी। ज्योतिषाचार्य पंडित चंदन व्यास ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि 6 कृतिकाओं शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसुइया तथा क्षमा का पूजन करने श्रद्धा अनुसार दान करने से सुख संपन्नता सहित सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है क्योंकि भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसी कारण से इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।