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राहुल गांधी और केएल शर्मा की सारथी बनेंगी प्रियंका गांधी, 40 सदस्यीय टीम पहुंची रायबरेली

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी रायबरेली में राहुल गांधी और अमेठी में केएल शर्मा की सियासी सारथी बनेंगी। वह चुनाव नहीं लड़ रही हैं, लेकिन दोनों जगह रिश्तों की डोर मजबूत करेंगी। वह सोमवार सुबह यहां पहुंचते ही बूथ कमेटी की समीक्षा करेंगी। वह नुकक्कड़ सभा के साथ ही घर-घर दस्तक देंगी। हालांकि पार्टी की ओर से अभी अधिकृत कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। लंबे समय तक चली रस्साकशी के बाद अंतिम दिन रायबरेली से राहुल गांधी और अमेठी से केएल शर्मा मैदान में उतर गए हैं। नामांकन के वक्त सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी भी राहुल के नामांकन में शामिल होकर एकजुटता का संदेश दिया। अब इन दोनों सीटों की कमान प्रियंका गांधी को सौंपी गई है। पार्टी की ओर से अभी तक अधिकृत कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है, लेकिन प्रियंका गांधी की 40 सदस्यी टीम रायबरेली पहुंच गई है। यह टीम प्रियंका के चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार कर रही। सूत्रों के मुताबिक प्रियंका गांधी सामाजिक न्याय के मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाएंगी। इसके लिए प्रदेशभर से डाटा इकट्ठा किए गए हैं। वह करीब 250 से ज्यादा नुक्कड़ सभा करेंगी। इन सभाओं में स्थानीय मुद्दे भी होंगे और मंच पर मौजूद लोगों को सामाजिक समीकरण की दृष्टि से रखा जाएगा। सूत्रों का यह भी दावा है कि टीम की ओर से तैयार किए गए रोडमैप के तहत वह कुछ इलाके में घर-घर जनसंपर्क करेंगी। इस बीच स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों और दशकों से गांधी परिवार के साथ पारिवारिक संबंध रखने वाले लोगों के घर तक जाएंगी। उनके ठहरने के लिए रायबरेली के एक गेस्ट हाउस में इंतजाम किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रियंका गांधी रायबरेली और अमेठी के बूथवार निगरानी करेंगी। इसके लिए पार्टी की ओर से उनकी टीम को दोनों लोकसभा क्षेत्र की कमेटियों की सूची रविवार को सौंप दी गई है। प्रदेश मुख्यालय से सभी कमेटियों को अलर्ट रहने का भी संदेश दिया गया है। वह सोशल मीडिया अभियान पर भी नज़र रखेंगी। उनकी टीम में कई ऐसे विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो फ़ेसबुक, ट्विटर, इंट्राग्राम और व्हाट्स एप पर नजर रखते हुए उनके संचालन के लिए रणनीति तैयार करेंगे। यह रणनीति प्रियंका गांधी के निर्देश के तहत बनेगी। चुनाव के दौरान शाम के वक्त प्रियंका गांधी अलग- अलग संगठनों के लोगों से संवाद करेंगी। इसके लिए रायबरेली और अमेठी के विभिन्न सामाजिक संगठनों की सूची भी इकट्ठा की गई है। वह बार एसोसिएशन और महिला समूहों से भी संवाद करेंगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रियंका गांधी रायबरेली से ही अन्य राज्यों में कुछ समय के लिए चुनाव प्रचार के लिए जा सकती हैं। वह यहां से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट जैसे नेताओं के निरंतर संपर्क में रहते हुए चुनाव अभियान का संचालन करेंगी। पार्टी के रणनीतिकारों की मानें तो प्रियंका गांधी के रायबरेली में रुकने की कई वजह है। वह यहां रुकर रिश्तों की दुहाई देंगी और इसके जरिए सियासी धार को मजबूत करेंगी। ऐतिहासिक तथ्य देखें तो 1952 से 62 तक फिरोज गांधी, 1962 से 1967 तक आरपी सिंह और फिर पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने यहां से रिश्ते मजबूत किए। बीच में एक दौर ऐसा भी आया कि पारिवारिक नजदीकी लोगों को रायबरेली की कमान मिली, लेकिन 1999 में सोनिया गांधी ने फिर इस क्षेत्र की कमान संभाल ली। पूरे प्रदेश इंडिया गठबंधन की ओर देख रहा है। राहुल गांधी के रायबरेली से उम्मीदवार बनने और प्रियंका गांधी के कमान संभालने का असर सभी लोकसभा क्षेत्रों में पड़ेगा। इस बार जनता ने बदलाव का मन बना लिया है।
सामाजिक न्याय सम्मेलन और रैली के जरिए माहौल बनाएंगे राहुल गांधी
लखनऊ। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और रायबरेली से पार्टी उम्मीदवार राहुल गांधी 10 मई के बाद उत्तर प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकते हैं। वह लखनऊ में सामाजिक न्याय सम्मेलन में हिस्सा लेकर जातीय जनगणना के मुद्दे को धार देंगे। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। यह कार्यक्रम विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से होगा। इसके लिए संभावित तिथि 10 मई मानी जा रही है। हालांकि अभी पार्टी की ओर से अधिकृत कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। इसी तरह 10 से 20 मई के बीच कन्नौज, बाराबंकी और लखनऊ में सपा- कांग्रेस की संयुक्त जनसभा की भी तैयारी चल रही है। इस जनसभा में राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव मौजूद रहेंगे। इसकी भी संभावना है कि इंडिया गठबंधन से जुड़े अन्य कई नेता भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लें। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जनसभा को लेकर भी जगह देखी जा रही है।