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पद्मश्री छीनकर इस पागल को गिरफ्तार किया जाए’, कंगना के आजादी वाले बयान पर भड़के उदित राज

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नई दिल्ली
कंगना रनौत के 1947 की आजादी को भीख बताए जाने वाले बयान पर सियासत शुरू हो गई है। साथ ही कंगना के बयान को लेकर उनकी सोशल मीडिया पर भी जमकर आलोचना हो रही है। बड़े राजनीतिक दलों के नेताओं की भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ उदित राज ने कंगना पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘मोदी सरकार ने मानसिक बीमार कंगना रनौत को पद्मश्री देकर संविधान , जनतंत्र और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है। पद्मश्री छीनकर इस पागल को गिरफ़्तार किया जाए।’ उन्होंने आगे लिखा ‘भाजपा प्रचारक पदमश्री कंगना रनौत ने कहा कि आजादी 2014 मे मिली। RSS ने 11 दिसम्बर 1948 को संविधान व डॉ अंबेडकर का पुतला जलाया था। ये दलित, आदिवासी,पिछड़े एवं महिलाओं की आजादी को मानते ही नही।’ इससे पहले बीजेपी के नेता और सांसद वरुण गांधी ने भी कंगना रनौत के 1947 की आजादी को भीख बताए जाने वाले बयान पर जमकर कंगना की फटकार लगाई। वरुण गांधी ने ट्वीट कर कहा, कभी महात्मा गांधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान, और अब शहीद मंगल पाण्डेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का तिरस्कार। इस सोच को मैं पागलपन कहूँ या फिर देशद्रोह?

दरअसल कंगना रनौत ने टाइम्स नाउ के कार्यक्रम में कहा था कि 1947 में मिली आजादी और हिंसा का जिक्र करते हुए कंगना ने कहा था कि वो आजादी नहीं थी बल्कि भीख थी। कंगना इतने पर ही नहीं रुकीं, उन्होंने आगे कहा कि जो आजादी मिली है वह 2014 में मिली है।

सोशल मीडिया पर हुई थी आलोचना
कंगना रनौत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। लोगों ने कहा कि कंगना हजारों कुर्बानियों को भीख बता रही हैं। कई लोगों ने यूपीए शासन काल के दौरान उन्हें नेशनल अवॉर्ड को स्वीकार किए जाने पर भी सवाल खड़े किए थे। यूजर का कहना था कि यदि वह आजादी भीख थी तो आपने वह नेशनल अवॉर्ड क्यों लिया। एक यूजर ने उन्हें झांसे की रानी का भी खिताब दिया। वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि कंगना खुद लकड़ी के घोड़े पर सवार होकर प्लास्टिक की तलवार लेकर वीरांगना बनती हैं।

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