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शिंदे-फडणवीस सरकार गैरकानूनी, कानून-संविधान की जानकारी रखनेवाले राज्यपाल ने उसे समुद्र में डुबो दिया है क्या? शिवसेना नेता संजय राऊत का कोश्यारी पर तंज

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मुंबई
शिंदे-फडणवीस सरकार गैरकानूनी और असंवैधानिक है। इसे पहली सरकार के निर्णय को बदलने का कोई अधिकार नहीं है। महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान राज्यपाल को कानून और संविधान की बहुत समझ थी। लेकिन अब उन्होंने उसे समुद्र में डुबो दिया है क्या? यह देखना पड़ेगा। ऐसा तंज कसते हुए शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर राज्य सरकार के एकतरफा समर्थन की भूमिका की खबर ली। महाराष्ट्र में मौजूदा सरकार उलझी हुई है। इस सरकार के सिर पर सुप्रीम कोर्ट की तलवार लटक रही है इसलिए इसका दिमाग सुन्न हो गया है। इन्हें काम करना है, ऐसा लगता नहीं है इसलिए ये पिछली सरकार के निर्णय को स्थगिती दे रहे हैं। लेकिन स्थगिती देते हुए उन्होंने अपना विवेक खो दिया है। नागपुर दौरे पर आए शिवसेना नेता संजय राऊत ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऐसी टिप्पणी की। संजय राऊत ने आगे कहा कि मैं शिवसेना का मालिक हूं क्या? यह बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना है। लाखों शिवसैनिक इस शिवसेना के लिए प्राण देने को तैयार हैं। हम निष्ठावान शिवसैनिक होने के नाते शिवसेना के साथ निष्ठा के साथ खड़े हैं। ऐसे निष्ठावान शिवसैनिकों के रहते हुए कोई शिवसेना को खत्म करने की बात करता है, तो निष्ठा की व्याख्या को बदलना पड़ेगा। ऐसा व्यंग्य संजय राऊत ने शिवसेना से टूटकर गए विधायकों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के जवाब में किया। राजनीतिक, आर्थिक विषय से जुड़े बुलेट ट्रेन के निर्णय को समझा जा सकता है। आरे का विषय तुम्हारे हित का था, यह भी समझ सकते हैं। उसके लिए हम संघर्ष करेंगे लेकिन औरंगजेब भाजपावालों का अचानक रिश्तेदार कैसे हो गया? औरंगजेब आपका कौन लगता है? निजाम काल में उस्मान भाजपा का कौन लगता था, ऐसा सवाल संजय राऊत ने फडणवीस से किया। केंद्र सहित किसी की भी परवाह न करते हुए बड़ी हिम्मत के साथ एक हिंदुत्ववादी भूमिका के तहत लोकहित की भावना का आदर करते हुए उद्धव ठाकरे ने औरंगाबाद का संभाजीनगर और उस्मानाबाद का धाराशीव नामकरण करने का निर्णय लिया। यदि फडणवीस और शिंदे गुट की सरकार ने इस निर्णय को स्थगिती दी तो इस सरकार को हिंदुत्व द्रोही और महाराष्ट्र द्रोही कहना पड़ेगा, ऐसा राऊत ने कहा।

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